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Monday, 27 February 2017

Truth of ajmer sharif

अजमेर शरीफ के दरगाह की सच्चाई:



अजमेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ थी कि वहाँ की कोई बैंच खाली नहीं थी। एक बैंच पर एक परिवार, जो पहनावे से हिन्दू लग रहा था, के साथ बुर्के में एक अधेड़ सुसभ्य महिला बैठी थी।

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बहुत देर चुपचाप बैठने के बाद बुर्खे में बैठी महिला ने बगल में बैठे युवक से पूछा, "अजमेर के रहनेवाले हैँ या फिर यहाँ घूमने आये हैं?"

युवक ने बताया, "जी अपने माता पिता के साथ पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के दर्शन करने आया था।"

महिला ने बुरा मुँह बनाते हुए फिर पूछा, "आप लोग अजमेर शरीफ की दरगाह पर नहीं गये?"

युवक ने उस महिला से प्रतिउत्तर कर दिया, "क्या आप ब्रह्मा जी के मंदिर गयी थीं?"

महिला अपने मुँह को और बुरा बनाते हुये बोली, "लाहौल विला कुव्वत। इस्लाम में बुतपरस्ती हराम है और आप पूछ रहे हैं कि ब्रह्मा के मंदिर में गयी थी।"

युवक झल्लाकर बोला, "जब आप ब्रह्मा जी के मंदिर में जाना हराम मानती हैं तो हम क्यों अजमेर शरीफ की दरगाह पर जाकर अपना माथा फोड़ें।"

महिला युवक की माँ से शिकायती लहजे में बोली, "देखिये बहन जी। आपका लड़का तो बड़ा बदतमीज है। ऐसी मजहबी कट्टरता की वजह से ही तो हमारी कौमी एकता में फूट पड़ती है।"


युवक की माँ मुस्काते हुये बोली, "ठीक कहा बहन जी। कौमी एकता का ठेका तो हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।

अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा था तो, शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए।

पृथ्वीराज चौहान गोरी को १७ बार युद्ध में हराने के बाद भी उसे छोड़ देता है जबकि एक बार उस से हारने पर चौहान के आँख फोड़ के बेरहमी से मार कर उसके शव को घसीटते हुए अफ़ग़ानिस्तान ले गया और दफ़्न किया।


आज भी चौहान के क़ब्र पर जो भी मुसलमान वहॉ जाता है प्रचलन के अनुसार उनके क़ब्र को वहॉ पे रखे जूते से मारता है। ऐसी बर्बरता कहीं नहीं देखी होगी। फिरभी हम हैं कि...बेवकुफ secular बने फिर रहे है...!




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